लोन से जुड़ी सीख: लोन का पैसा डाइवर्ट न करें

धन से जीवन

आपकी लाइफ तब बदलती है जब आपकी इकॉनमी बदलती है

आप चाहे कितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर लें

मगर जब तक आपका आर्थिक स्तर नहीं बदलता तब तक आपकी ज़िन्दगी नहीं बदलती

इस दुनिया में आपको पहचान भी तभी मिलती है जब आपके पास सांसारिक साधन होते हैं

और आपका आर्थिक स्तर तब बदलता है जब आपकी सोच बदलती है|

मैंने देखा है कि लोग खुद ही अपना आर्थिक स्तर नहीं बदलना चाहते|  शायद वो इस बात को समझते नहीं हैं या अभी तक जानते नहीं हैं कि वो अपनी आर्थिक स्थिति के लिए खुद ही जिम्मेदार हैं|  जैसे मैं आपको बताता हूँ कि मैंने बनकर की हैसियत से क्या देखा|  मैं आपको बताना चाहूँगा कि कैसे हमारी रूढ़िवादी सामाजिक रीतियाँ हमें गरीबी में जकड़ी हुई हैं| 

कई सारे किसान भाई बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाते हैं|  किसान क्रेडिट भारत सरकार की किसान भाइयों के लिए महत्वकांक्षी योजना है|  किसान क्रेडिट कार्ड योजना में किसान मित्र अपने खेतों में फसल उगाने के लिए आने वाले खर्चे को बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं|  किसान क्रेडिट कार्ड योजना में किसान मित्रों को उन्नत किस्म के बीज खरीदने, खाद खरीदने, सिंचाई और कीटनाशकों के लिए होने वाले खर्चे के लिए बहुत ही कम ब्याज पर ऋण मिल जाता है| 

लेकिन किसान मित्र किसान क्रेडिट कार्ड इस लिए बनवाते हैं क्यूंकि वो इसे पर्सनल लोन समझते हैं|  पर्सनल लोन का मतलब निजी खर्चे|  अधिकाँश किसान मित्र जो किसान क्रेडिट कार्ड योजना में ऋण लेते हैं वो उस ऋण राशि को शादी के खर्चे में या पारिवारिक और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खर्च कर देते हैं|  कई बार उन्हें घर परिवार में बीमार सदस्य के उपचार हेतु खर्चे करने पड़ते हैं तो वो अपना किसान क्रेडिट कार्ड का पैसा यूज़ कर लेते हैं| 

बैंकिंग भाषा में इसे फंड का दुरूपयोग कहा जाता है|  फंड जो कि आपको खेती उपजाने के लिए दिया गया उसको आपने अपने निजी खर्चे में यूज़ कर लिया|  जाहिर सी बात है कि आप खेत में अच्छी फसल नहीं उगा पाएंगे और जब आपको ऋण राशी को ब्याज समेत लौटाने का समय आयेगा तब आप बैंक से डिफाल्ट कर जायेंगे और अपनी किश्तों को समय पर जमा नहीं कर पायेंगे|  एक बार जब आपकी किश्त टूटेगी तो आप के ऊपर पेनल्टी लगेगी और ज्यादा ब्याज लग्न शुरू हो जायेगा| 

जहाँ आपको 7 % प्रति वर्ष का ब्याज देना पड़ रहा था अब आपको वहीँ 9, 10 या 11 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज देना पड़ेगा|  और फिर बकाया राशी पर चक्र वृद्धि ब्याज लगेगा|  इस तरह किसान मित्र अपनी ऋण राशी को साल दर साल डिफाल्ट करते जाते हैं और फिर वो राशि इतनी बड़ी हो जाती है कि उसके बाद आपको बैंक के साथ लोन सेटलमेंट करने कि स्थति आ जाती है|  लोन सेटलमेंट का मतलब बैंक और किसान के बीच में समझौता|  बैंक कहती है कितना दे सकते हो और किसान अपनी हैसियत से जितना दे सकता है देता है और समझौता कर लेता है| 

लेकिन समझौता होने के बाद फिर आपकी क्रेडिट स्कोर में लिख दिया जाता है कि आपने बैंक से लोन लिया था जिसका आपने समझौता किया है|  ऐसी स्थिति में कोई भी बैंक आपको लोन देने से कतरायेगा| 

और फिर किसान मित्र सरकारी कर्जा माफ़ी घोषणाओं का इंतज़ार करते हैं|  जहाँ किसान मित्रों को आत्मनिर्भर बनने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना मदद कर सकती है वहीँ वो उसके उपयोग को नहीं समझ पाते और ऋण के जाल में फंसते चले जाते हैं|  लोन का पैसा जब आप किसी भी मकसद के लिए लें तब उसी मकसद से यूज़ खर्च करें| 

अगर आपने लोन किसानी-खेती करने के लुए उठाया है तो फिर उसी में यूज़ करें|  उसे किसी और काम के लिए डाइवर्ट न करें|  ऐसा करने पर आप लोन और उसका ब्याज समय पर चुका पाएंगे|  जब आप बैंक का लोन समय पर चुकायेंगे तो बैंक भी आपको लोन त्वरित देगी, बढ़ाकर देगी क्यूंकि आपका क्रेडिट व्यवहार बढ़िया रहेगा|  लोन लेना कोई गलत नहीं लेकिन लोन लेकर उस धन राशी को डाइवर्ट करने से आप लोन के जाल में फंसते चले जाते हैं|  इसलिए खुद का पैसा चाहे आप जहाँ चाहें वह लगा दें मगर लोन का पैसा वहीँ लगे जिसके लिए लोन लिया गया है|