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  • बिल गेट्स ने अपने आपको इतना अमीर कैसे बनाया

    क्या आप बिल गेट्स के बारे में जानते हैं। बिल गेट्स दुनिया के ऐसे अमीर इंसान हैं जो दुनिया भर में 20 साल से अधिक फोर्ब्स की बिलियनेयर लिस्ट के शीर्ष पर रहे हैं। अभी अभी उनका नाम आपको टॉप बिलियनेयर की लिस्ट में मिल जायेगा।

    तो फिर ये जानने की उत्सुकता बनती है कि कैसे बिल गेट्स ने अपने आपको अमीर बनाया। क्या वो पहले से ही अमीर इंसान थे। मेरा मतलब क्या उन्हे कुछ दौलत विरासत में मिली थी?

    अक्सर जो ट्रेंड मैने देखा है ऐसे वर्ल्ड फेमस लोगों में वन है कि वो कभी ये सोचकर अपने जिंदगी नहीं जी रहे थे कि उन्हे सबसे अमीर या सबसे फेमस या सबसे चर्चित इंसान धरती पर बनना है। जो बात इन सभी में कॉमन दिखती है मुझे वो ये है कि वे सभी इंसान किसी कंपटीशन का हिस्सा कभी बने ही नहीं क्योंकि उन्होंने कभी अपने आपको किसी कंपटीशन का हिस्सा माना ही नहीं।

    ये तो आम जनता को लगता है कि सबसे अमीर, सबसे चर्चित व्यक्ति हैं मगर बिल गेट्स जैसे लोग जो सबसे ज्यादा तवज्जो किसी चीज को देते आए और शीर्ष तक पहुंचे वो है उनकी सोच और सोच से जुड़े जुनून। ऐसे लोग जुनून से भरे और ऊर्जा से भरे होते हैं।

    तो आइए जानते हैं कि किस तरह बिल गेट्स दुनिया के टॉप बिलियनेयर और अब टॉप फीलेंथ्रोफिस्ट बने।

    बिल गेट्स किसी भी अमीर घराने से नहीं आते

    बिल गेट्स ने जो भी पैसा बनाया वो उन्होंने अपनी कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट से बनाया जिसके वो कोफाउंडर हैं। मतलब वो एक कामयाब कंपनी के कामयाब फाउंडर हैं।

    बिल गेट्स ने अपने दर्जनों इंटरव्यू में ये बात कही है कि वो कभी नहीं जानते थे कि उन्हे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बिजनेस में ऐसी कामयाबी मिलेगी। कम से कम शुरुआती दिनों में तो नहीं जब वो कंप्यूटर पर घंटों बैठकर उसके लिए कोड्स लिखा करते।

    इत्तेफाक की बात है कि जिस स्कूल में बिल गेट्स पढ़ते थे उसी स्कूल में एक कंप्यूटर था जिसपर वो स्कूल समय के बाद बैठकर अपने दोस्त पॉल एलन के साथ कोड्स लिखा करते और देखते कि किस तरह वो किसी काम को कुछ इंस्ट्रक्शन देकर कर बिना इंसान की मदद से कर लेते हैं। ये बात उनको बहुत बड़ी किक देती।

    वो बस इसी बात में डूबे रहते कि क्या नायाब चीज है कंप्यूटर 💻 जो इंसान के दिमाग की तरह काम करता है। तब वो बहुत छोटे थे मगर उनको बचपन से ही दिमागी चीजों में बहुत मन लगता।

    जब वो कुछ बड़े हुए और कॉलेज जाने का समय आया तो उन्होंने भी कॉलेज में एडमिशन लिया और वो कुछ समय के लिए हार्वर्ड कॉलेज गए भी मगर वहां जाकर अपने कंप्यूटर की रोमांचकारी जिंदगी को मिस करने लगे।

    तब तक उन्होंने अपनी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी भी बनाने की सोच ली थी। महज 16 साल के रहे होंगे तब। लेकिन उनको तब तक ये बात पता चल चुकी थी कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की दुनिया में कुछ किया जा सकता है। और ये क्लैरिटी उन्हे मिली थी उनके कई घंटों की स्कूल की कंप्यूटर दीवानगी से।

    और फिर उन्होंने महज 17 साल की उमर में अपने दोस्त पॉल एलन के साथ मिलकर अपनी कम्पनी स्टार्ट की जिसको नाम दिया माइक्रोसॉफ्ट।

    कंपनी ने तब अपने क्लाइंट्स को जो उनके पहले कस्टमर्स थे उन्हे ये भरोसा दिलाया कि किस तरह वो कंप्यूटर कोडिंग से ऑफिस के कई काम जैसे अकाउंटिंग 🧾 और भी कई तरह के ऑफिस पेपर वर्क को कंप्यूटर के जरिए तेज़ कर सकते हैं और अपनी फैक्ट्री या कम्पनी की उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं।

    पहले पहले तो एक जवान से कॉलेज की छोकरे जैसे दिखने वाले बिल पर किसी को विश्वास नहीं हुआ मगर फिर जैसे जैसे उन्होंने अपने काम का जादू दिखाया तो उनकी उमर पीछे छूट गई और उनके काम को इज्जत और दाम दोनो मिलने लगा।

    1985 में उन्होंने अपनी कम्पनी स्टार्ट की थी और 1995 में उन्होंने अपना पहला लाइसेंस सॉफ्टवेयर मार्केट में उतारा जिसे नाम दिया गया विंडोज। Windows 95 से तो पूरी दुनिया वाकिफ है ज्यादा बताने की जरूरत नहीं। बिल गेट्स ने अपने windows 🪟 को दुनिया के हर डेस्कटॉप पर देखने का सपना देखा और यही सपना उन्हे दुनिया के सबसे अमीर इंसानों में लाकर खड़ा कर दिया।

    आज बिल गेट्स और माइक्रोसॉफ्ट दोनो ही दुनिया में अपने परिचय के लिए मोहताज नहीं मगर उससे बढ़कर बात ये है कि कंप्यूटर क्रांति लाने वाले बिल गेट्स ने सचमुच दुनिया को प्रोग्रामिंग की ताकत से कितना बेहतर बनाया है इसमें कोइंडो राय नहीं।

    आज कंप्यूटर न हो तो मॉडर्न बैंकिंग की कल्पना करना असंभव है। इंटरनेट शॉपिंग की कल्पना करना असंभव है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग की कल्पना करना असंभव है।

    बिल गेट्स ने खरबों की संपत्ति बनाई है। मगर उसके बाद अपने सिंहासन पर बैठने के बजाय वो दुनिया भर में घूम घूम कर अपनी अर्जित संपत्ति को दुनिया के हित में खर्च कर रहे हैं अपने फाउंडेशन के जरिए। उनकी एक नॉन प्रॉफिट संस्था है और उसका लक्ष्य है कि गरीब देशों जैसे अफ्रीका और एशिया में स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाना।

    आप उन्हे बड़ी आसानी से उनके ट्विटर हैंडल, इंस्टा पेज या फिर उनके ब्लॉग पर अपने फोजंडेशन से जुड़ी तस्वीरें और अन्य कार्य शेयर करते मिल जाएंगे।

    अमीर बनने का कोई घमंड नहीं है। और बड़े ही सरल इंसान हैं और सबसे बड़ी बात जो मुझे उनका फैन बनाती है कि वो आज भी उतने ही जुनून से भरे रहते हैं जितने वो अपने स्कूल डेज में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को लेकर थे।

  • बिना बताए भी आपकी जेब काटने के तरीके हैं।

    बिना बताए भी आपकी जेब काटने के तरीके हैं।

    हाल ही में मैं इंडिया कॉफी हाउस के रेस्टोरेंट में गया। यहां पर अक्सर जाया करता हूं। कॉलेज के दिनों से। आप इंडिया के किसी भी इंडिया कॉफी हाउस में चले जाएं , आपको वही स्वाद इडली का और दोसे का मिलेगा।

    इसलिए जब भी कहीं बाहर गया, सबसे पहले इंडिया कॉफी हाउस का रेस्टोरेंट ही खोजता हूं। आप अब समझ गए होंगे कि इंडिया कॉफी हाउस मेरे दिल के कितने करीब है।

    वहां पर सर्विस भी बढ़िया मिलती आई है मगर पिछली बार कुछ मेरे साथ ऐसा हुआ कि मेरा मन खट्टा हो गया।

    जब भी आप कहीं रेस्टोरेंट में जाते हैं तो वहां पर आपको बिठाने के बाद सबसे पहले पानी पूछा जाता है। इंडिया कॉफी हाउस के सर्विस बॉयज भी आज तक ऐसा ही करते आए थे। वो आपके सीट पर बैठने के बाद तुरंत आपके सामने रखे ग्लास में पानी डालते और फिर उसके बाद आपको मेनू कार्ड देते। और आपका ऑर्डर लेते।

    आजकल कई लोग पैकेज ड्रिंकिंग वाटर मांगते हैं। मैंने भी कई बार पैकेज ड्रिंकिंग वाटर की मांग की है और उसके लिए से किया है। जाहिर सी बात है कि यदि आप के सादा पानी के बजाय जो फ्री में दिया जाता है की जगह पैकेज ड्रिंकिंग वाटर की मांग करेंगे तो आपको पे भी करना ही होगा।

    लेकिन अब इंडिया कॉफी हाउस ने एक ऐसा ट्रेंड शुरू किया है कि आप की जेब कटेगी लेकिन आपको पता कटने के बाद चले। अब उनकी टेबलों पर कोई पानी का ना तो ग्लास ही दिखेगा और ना ही जग।

    आपको अब सादे पानी की बजाय एक 200 ml की पानी की बोतल मिलेगी। ये बोतल ठीक उसी समय आपके टेबल पर आपको परोसी जाएगी जब आप बैठते हैं और आपको सादा पानी ऑफर होते आ रहा है। आप भी सोचकर पी लेंगे कि ये तो छोटी सी 200 ml की बोतल इंडिया कॉफी हाउस की तरफ से फ्री में दी गई होगी।

    मगर इस भ्रम में ना रहें क्योंकि जब आप अपना बिल पे करेंगे तब आपको आपके बिल में उसका चार्ज जुड़कर आएगा।

    है ना ये मिलियन डॉलर आइडिया ठगी का। आप जरा सोचिए कि पानी के कांच के ग्लास , साफ पीने का पानी और उसको रखने के लिए जो बड़े बड़े गैलन लगते थे और उन पर जो खर्च आता था अब वो इंडिया कॉफी हाउस का और पैकेज ड्रिंकिंग वाटर कंपनियों के लिए आपसे ठगी का कितना शानदार रास्ता बन गया।

    जहां पर इंडिया कॉफी हाउस को अभी तक खर्च करने पड़ते थे वहीं अब उससे वो कमाएंगे।

    उनसे पूछने पर उन्होंने बताया कि वो इसलिए बोतल देते हैं क्योंकि गर्मी है और लोगों को ठंडा पानी पसंद है।

    मेरा ये कहना है कि फिर आप 200 ml नहीं पूरी एक लीटर बोतल रखिए और ग्राहक को बता दीजिए कि उसका चार्ज लगेगा। लेकिन उनको पता है कि ऐसा करने पर बवाल मचेगा। इसलिए बोतल का साइज छोटा रखा है ताकि आपकी जेब थोड़ी सी ही कटे जिसको आप माइंड भी ना करें।

    मगर मेरा ये कहना है कि आपने फ्री पानी की जगह चार्जेबल आइटम ऑफर करना शुरू किया तो कृपया उसे ग्राहक को स्पष्ट करें ताकि मुझ जैसे ग्राहक जो इंडिया कॉफी हाउस के लॉयल कस्टमर हैं वो इंडिया कॉफी हाउस से अपनी बेइंतहां मोहब्बत सिर्फ इसलिए न तोड़े क्यूंकि आप बिना बताए जेब काट रहें हैं।